देहरादून, 10 अप्रैल (वार्ता )। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), उत्तराखंड द्वारा देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण, ABHA ID के अधिकाधिक निर्माण, टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार तथा राज्य में ABDM के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि सुबोध उनियाल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन देश में डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति की मजबूत नींव है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी ABHA ID बनवाकर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाएं, जिससे सेवाएं अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बन सकें।
कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण सत्र से हुई, जिसके बाद विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करते हुए डॉ. पंकज कुमार अरोरा, निदेशक ABDM (NHA) ने बताया कि मिशन के माध्यम से देशभर में एकीकृत डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने हेल्थ आईडी, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और इंटरऑपरेबिलिटी के महत्व को रेखांकित किया।
ABDM एवं आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के एकीकरण पर ज्योति यादव, संयुक्त सचिव (NHA) ने डिजिटल क्लेम प्रोसेसिंग, लाभार्थी ट्रैकिंग और डेटा इंटीग्रेशन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि इससे नागरिकों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
राज्य स्तर पर प्रगति की जानकारी देते हुए राज्य मिशन निदेशक (ABDM) एवं CEO, स्टेट हेल्थ अथॉरिटी उत्तराखंड रीना जोशी ने बताया कि राज्य में ABHA ID निर्माण, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के एकीकरण में तेजी आई है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो रही है।
उद्घाटन सत्र में सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य उत्तराखंड सचिन कुर्वे ने डिजिटल हेल्थ सेवाओं को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। वहीं, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के CEO डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने डिजिटल हेल्थ गवर्नेंस, डेटा सुरक्षा और ABDM के राष्ट्रीय विजन पर प्रकाश डालते हुए राज्यों को नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
तकनीकी सत्र में प्रज्ञा पालिवाल ने जमीनी स्तर पर ABDM के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों और उनके समाधान साझा किए, जबकि राहुल वशिष्ठ ने सुष्रुत क्लिनिक, CDSS एवं DHIS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाओं में आए सकारात्मक बदलावों को प्रस्तुत किया गया।
समापन अवसर पर राज्य मिशन निदेशक रीना जोशी ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड के लिए परिवर्तनकारी पहल साबित हो रहा है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और हितधारकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी विभागों, स्वास्थ्य संस्थानों और तकनीकी साझेदारों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
