वैज्ञानिक शोध लेखन में एआई की भूमिका पर फोकस, एसजीआरआरयू में अंतरराष्ट्रीय संवाद

Spread the love

देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू) के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स स्टडीज एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में ‘शोध क्षमताओं का विकास: गुणात्मक और मात्रात्मक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर एक सप्ताह का अंतरराष्ट्रीय फेकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम (आईएफडीपी) आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 15 जनवरी से 20 जनवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश के विषय विशेषज्ञ संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य संरचित तकनीकी सत्रों, विशेषज्ञ संवादों और व्यावहारिक अंतर्दृष्टियों के माध्यम से संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं की अनुसंधान दक्षताओं को सुदृढ़ करना है। आईएफडीपी के पहले दिन कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम संयोजक प्रो. (डॉ.) सोनिया गंभीर, डीन, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स स्टडीज एवं निदेशक, आईक्यूएसी ने स्वागत संबोधन देते हुए एफडीपी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
इसके पश्चात संरक्षक एवं विशिष्ट अतिथि, माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रथापन, मुख्य अतिथि डॉ. अंशुल गर्ग, कार्यक्रम निदेशक, टेलर्स यूनिवर्सिटी, मलेशिया तथा अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। विशिष्ट अतिथि ने अपने संबोधन में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, वैश्विक प्रकाशन मानकों तथा अंतःविषय सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं मुख्य अतिथि ने अकादमिक प्रकाशन, अनुसंधान नैतिकता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध के प्रभाव को बढ़ाने पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. दीप्ती प्रकाश द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ किया गया। इसके बाद तकनीकी सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर (डॉ.) पंकज मदान संसाधन व्यक्ति के रूप में शामिल हुए। सत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान लेखन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें एआई टूल्स के उपयोग, शोध पत्र की संरचना, अनुसंधान अंतराल की पहचान, उपयुक्त पत्रिका चयन, प्रभाव मापदंड, सहकर्मी समीक्षा प्रक्रिया और नैतिक प्रकाशन प्रथाओं जैसे विषय शामिल रहे।
प्रतिभागियों ने सत्र में सक्रिय सहभागिता करते हुए धोखाधड़ी करने वाली पत्रिकाओं से बचाव तथा पांडुलिपि की गुणवत्ता सुधारने संबंधी व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के आगामी दिनों में भी विभिन्न तकनीकी एवं अकादमिक सत्रों के माध्यम से शोध क्षमताओं के विकास पर गहन विमर्श किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *