प्रकृति बनी प्रयोगशाला, आसमान बना कक्षा: नन्हे वैज्ञानिकों ने रचा नया इतिहास

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रामगढ़। राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रामगढ़ में शुक्रवार को “प्रकृति लेखन के माध्यम से विज्ञान संप्रेषण” विषय पर आयोजित विशेष कार्यशाला ने नन्हे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच की नई रोशनी जगा दी। कार्यशाला में बच्चों ने न केवल प्रकृति को समझना सीखा, बल्कि उसे शब्दों में ढालने की कला भी आत्मसात की।
कार्यक्रम का आयोजन Altitudinal Academia for Science with Holistic Vision of Innovation (AASHVI) द्वारा किया गया, जिसे उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) का सहयोग मिला।
कार्यशाला का नेतृत्व AASHVI की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंजलि शंकर ने किया। उन्होंने बच्चों को आसपास के वातावरण का बारीकी से अवलोकन कर उसे सरल और प्रभावी भाषा में लिखने के गुर सिखाए। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने प्रकृति को नए नजरिए से देखना सीखा।
इसके बाद डॉ. अदिति चौहान, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, डॉल्फिन (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज (DIBNS) ने गतिविधि-आधारित सत्र में बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता को निखारने पर जोर दिया। खेल-खेल में सीखने की तकनीकों ने बच्चों को खासा आकर्षित किया।
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक पड़ाव खगोल विज्ञान सत्र रहा, जिसे डॉ. आशीष रतूड़ी एवं उनकी टीम ने संचालित किया। दूरबीन के जरिए आकाश की दुनिया से परिचित होते ही बच्चों में उत्साह चरम पर दिखा और उन्होंने अंतरिक्ष के प्रति गहरी जिज्ञासा प्रकट की।
कार्यशाला में कक्षा 5 के 23 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता दिखाई।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अरविंद सिंह सोलंकी ने आयोजन के लिए AASHVI और UCOST का आभार जताते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होती हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।

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