देहरादून, 17 फरवरी 2026।
पशुचिकित्सा सेवाओं को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद द्वारा पशुपालन विभाग के पशुचिकित्साधिकारियों के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। “Fractures Management & Orthopaedic Techniques in Animals for Field Veterinarian” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण में राज्य के 20 पशुचिकित्साधिकारी भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक पशुपालन विभाग डा. उदय शंकर तथा परिषद अध्यक्ष डा. कैलाश उनियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। दोनों अधिकारियों ने पशुचिकित्सकों के कौशल उन्नयन को समय की आवश्यकता बताते हुए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल दिया।
प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ के रूप में डा. रोहित कुमार, सहायक प्रोफेसर, भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली ने पशुओं में फ्रैक्चर प्रबंधन और उन्नत ऑर्थोपेडिक तकनीकों की विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी दी।
इस अवसर पर परिषद के रजिस्ट्रार डा. प्रलयंकर नाथ ने बताया कि “सतत कौशल विकास कार्यक्रम” के अंतर्गत पशुचिकित्सकों की दक्षता बढ़ाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण लगातार आयोजित किए जाएंगे।
निदेशक डा. उदय शंकर ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और पशुपालकों को बेहतर उपचार सुविधा देने का आह्वान किया। वहीं डा. कैलाश उनियाल ने प्रत्येक जनपद में मॉडल पशुचिकित्सालय स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयास की आवश्यकता बताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में पशुचिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
अब पशुओं का बेहतर इलाज: विशेषज्ञों से सीख रहे राज्य के डॉक्टर
