रुड़की। पवित्र माह रमजान उल मुबारक के दूसरे जुमा पर नगर एवं आसपास के क्षेत्रों की मस्जिदों में अकीदत का सैलाब उमड़ पड़ा। रोजेदारों ने पूरे खशू-खुजू के साथ जुमा की नमाज अदा कर मुल्क में अमन, तरक्की और खुशहाली की दुआएं मांगीं। नमाज को लेकर प्रशासन भी सतर्क नजर आया और सभी स्थानों पर व्यवस्था शांतिपूर्ण रही।
नगर की प्रमुख जामा मस्जिद में जुमा की नमाज मुफ्ती मोहम्मद सलीम ने अदा कराई। जुमा से पूर्व तकरीर करते हुए मदरसा रहमानिया के प्रधानाचार्य मौलाना अजहर उल हक ने कहा कि रमजान का महीना रहमतों, बरकतों और मगफिरत का महीना है। उन्होंने बताया कि पहला अशरा रहमत का अब समाप्त हो रहा है और दूसरे अशरे मगफिरत की शुरुआत हो रही है, जिसमें बंदा अपने गुनाहों से तौबा कर अल्लाह से माफी मांगता है।
उन्होंने एतकाफ की अहमियत बताते हुए कहा कि रमजान के आखिरी दस दिनों में मुसलमान मस्जिदों में बैठकर विशेष इबादत करते हैं, जिससे रूहानी सुकून हासिल होता है और इंसान गुनाहों से पाक हो जाता है। उन्होंने अपील की कि इस पाक महीने में गरीब, बेसहारा और मजलूम लोगों की दिल खोलकर मदद करें, क्योंकि रमजान में हर नेकी का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है।
मदरसा लाठरदेवा स्थित मस्जिद में कारी मोहम्मद शमीम ने जकात, सदका और फितरा की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष फितरे की रकम 50 रुपये तय की गई है। उन्होंने कहा कि रोजा केवल इबादत ही नहीं, बल्कि यह जिस्मानी और रूहानी बीमारियों की दवा भी है। रोजा इंसान को सब्र, तकवा और इंसानियत का पैगाम देता है।
मौलाना अरशद कासमी, मौलाना मोहम्मद हारुन, कारी नफीस अहमद, मौलाना मोहम्मद यूसुफ, कारी जाकिर हुसैन, कारी कलीमुद्दीन, कारी मोहम्मद जफर, हाफिज अशरफ हुसैन और कारी सरफराज अली सहित अन्य उलेमाओं ने भी रमजान की फजीलत पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस मौके पर इंजीनियर मुजीब मलिक, डॉ. नैयर काजमी, कुंवर जावेद इकबाल, हाजी मोहम्मद सलीम खान, हाफिज मोहम्मद वसीम, हाजी मोहम्मद मुस्तकीम, कारी एहतेशाम, कारी कलीम अहमद, हाजी नौशाद अहमद, इमाम नदीम उल हक, शेख अहमद जमां, इमरान देशभक्त, एडवोकेट कौसर सिद्दीकी, हाजी गुलफाम अहमद, अता उर्रहमान अंसारी, बिट्टन त्यागी, सलमान फरीदी सहित बड़ी संख्या में रोजेदार मौजूद रहे।
जुमा की नमाज में अमन-चैन की दुआ, जरूरतमंदों की मदद की अपील
