डॉ. विजय धस्माना की दूरदृष्टि का प्रतिफल: हिम्स ने दुनिया के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में बनाई जगह

Spread the love

देहरादून/डोईवाला। शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सरोकारों के समन्वय से उत्कृष्टता की नई इबारत लिख रहे हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) एवं स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) ने एक बार फिर विश्व पटल पर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। प्रतिष्ठित टाइम्स हायर एजुकेशन सस्टेनेबिलिटी इंपैक्ट रैंकिंग-2026 में विश्वविद्यालय ने 201-300 ग्लोबल रैंक बैंड में स्थान हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का संगम वैश्विक पहचान का आधार बन सकता है।

दुनिया के 1600 से अधिक विश्वविद्यालयों के बीच हासिल यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि उस सोच और दृष्टि का सम्मान है जिसने शिक्षा को कक्षाओं की सीमाओं से निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

जौलीग्रांट स्थित विश्वविद्यालय ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर आधारित मूल्यांकन में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

विशेष रूप से स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (एसडीजी-6) के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने विश्व स्तर पर 89वीं रैंक प्राप्त कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वहीं स्वास्थ्य एवं कल्याण, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी विश्वविद्यालय का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि हिम्स और एसआरएचयू शिक्षा के साथ-साथ समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी गंभीरता से निभा रहे हैं।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने इस सफलता को पूरे विश्वविद्यालय परिवार की सामूहिक साधना और समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान की प्राथमिकता केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक विकास के क्षेत्र में जो कार्य किए हैं, वे आज वैश्विक मंच पर सम्मानित हो रहे हैं।

डॉ. धस्माना ने कहा कि यह सम्मान भविष्य की और बड़ी जिम्मेदारियों का संकेत है। विश्वविद्यालय निरंतर नवाचार, अनुसंधान और सामुदायिक विकास के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता कोई मंजिल नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली यात्रा है और एसआरएचयू इसी यात्रा को और अधिक व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से उच्च मान्यताएं प्राप्त हो चुकी हैं। ए+ ग्रेड से सम्मानित यह संस्थान आज उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अग्रणी शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है।

टाइम्स हायर एजुकेशन की इस वैश्विक रैंकिंग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो, लक्ष्य स्पष्ट हों और समाज के प्रति प्रतिबद्धता सच्ची हो, तो पहाड़ की वादियों से उठी एक संस्था भी दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की कतार में सम्मानजनक स्थान हासिल कर सकती है। हिम्स और एसआरएचयू की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बन गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *