मानव सेवा की नई पहचान बना इन्दिरेश अस्पताल, लाल पुल हादसे के घायलों को मिला त्वरित और निःशुल्क उपचार

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देहरादून। लाल पुल पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा भाव का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने संकट की घड़ी में चिकित्सा सेवा को मानवता का पर्याय बना दिया। आर्थिक रूप से कमजोर प्रवासी मजदूरों को बिना किसी औपचारिकता और आर्थिक चिंता के तत्काल निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराकर अस्पताल ने यह साबित किया कि चिकित्सा केवल उपचार नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संकल्प भी है।

23 जून को पटेल नगर स्थित लाल पुल के समीप रोजगार की तलाश में सड़क किनारे खड़े उत्तर प्रदेश और बिहार के सात मजदूर एक अनियंत्रित सिटी बस की चपेट में आ गए। बताया गया कि बस चालक को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ने से वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया और मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और घायलों को तत्काल श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल प्रशासन ने बिना किसी देरी के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को उपचार में लगाया। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आईसीयू में निरंतर निगरानी के बीच सभी घायलों का उपचार शुरू किया गया। हालांकि गंभीर चोटों के कारण दो मजदूरों की जान नहीं बचाई जा सकी, लेकिन शेष पांचों घायल अब खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं और उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है।

दुख की इस घड़ी में घायलों के परिजनों ने इन्दिरेश अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और पूरे चिकित्सा दल की संवेदनशीलता तथा समर्पण की मुक्तकंठ से सराहना की। उनका कहना है कि यदि समय पर निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण उपचार नहीं मिलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। अस्पताल ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का संबल बनकर मानव सेवा की सच्ची भावना का परिचय दिया है।

इधर जिला प्रशासन और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस चालक और बस स्वामी को गिरफ्तार कर दुर्घटनाग्रस्त बस को सीज कर दिया है। उत्तर प्रदेश एवं बिहार नागरिक मंच ने घटना की निष्पक्ष जांच, घायलों के उपचार का पूरा खर्च बस स्वामी से दिलाने, प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये तथा मृतकों के आश्रितों को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। मंच ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि चालक गंभीर बीमारी से पीड़ित था तो उसे सार्वजनिक परिवहन वाहन चलाने की अनुमति और फिटनेस प्रमाण-पत्र किस आधार पर जारी किया गया।

इस दर्दनाक हादसे के बीच श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने जिस संवेदनशीलता, तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ जरूरतमंदों का उपचार किया, उसने चिकित्सा सेवा के सामाजिक दायित्व को नई पहचान दी है। संकट की इस घड़ी में अस्पताल की भूमिका न केवल घायलों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई, बल्कि समाज के सामने मानवता और सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण भी बनकर उभरी।

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