SRHU में आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम, डॉक्टरों से विद्यार्थियों तक निभा रहे रामायण के पात्र

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देहरादून/डोईवाला। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट के सेंट्रल पार्क में रविवार को हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट (एचआरडब्ल्यूटी) की ओर से रामलीला महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। गणेश पूजन के साथ शुरू हुए महोत्सव में भगवान श्रीराम और माता सीता के जन्म प्रसंगों के सजीव मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। रामायण की विभिन्न लीलाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को मंच पर जीवंत किया जा रहा है।

महोत्सव के शुभारंभ से पूर्व कलाकारों ने विधिवत पूजन कर भगवान श्रीराम का स्मरण किया और आयोजन की सफलता की कामना की। पहले दिन श्रवण लीला, रावण तपस्या, शिव-पार्वती प्रसंग, विष्णु-लक्ष्मी प्रसंग, दशरथ प्रसंग, राम जन्म, जनक प्रसंग और सीता जन्म की लीलाओं का मंचन किया गया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया।

विश्वविद्यालय परिवार निभा रहा पात्रों की भूमिका

इस रामलीला महोत्सव की खास बात यह है कि इसमें विश्वविद्यालय के डॉक्टर, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ, विभिन्न फैकल्टी के सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं स्वयं विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल विश्वविद्यालय परिवार को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीराम का जीवन चरित्र मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श जीवन की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है।

20 अक्टूबर तक होगा मंचन

रामलीला महोत्सव के तहत 20 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। आगामी दिनों में सीता स्वयंवर, राम वनवास, भरत मिलाप, सीता हरण, लंका दहन, लक्ष्मण शक्ति, संजीवनी बूटी, कुंभकरण वध, मेघनाद वध और रावण वध जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। 20 अक्टूबर को दशहरा उत्सव के साथ महोत्सव का समापन होगा।

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