योग, स्वास्थ्य और संस्कार का संगम: श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य आयोजन

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देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के प्रचार अभियान के तहत आयोजित “100 दिवस में 100 शहरों में” कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय योग कार्यशाला एवं सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के पथरी बाग स्थित हैलीपैड ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 800 छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर योग और स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

कार्यक्रम को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के राजकीय शोक को ध्यान में रखते हुए श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित किया गया। शुरुआत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा योगाभ्यास का पुण्यफल उनकी स्मृति को समर्पित करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।

सामूहिक योगाभ्यास के दौरान प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय योग प्रोटोकॉल का पालन करते हुए योग की विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। परिसर के प्राकृतिक वातावरण और सामूहिक ऊर्जा ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का प्रभावी साधन भी है। उन्होंने सभी को नियमित योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य वक्ता डॉ. सुनील कुमार जोशी ने मर्म चिकित्सा और योग के समन्वय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। वहीं आयुष मंत्रालय के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. रामनारायण मिश्र ने मानसिक शुद्धि और आंतरिक संतुलन में योग की भूमिका को रेखांकित किया। ऑनलाइन संबोधन में बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश के डीन डॉ. मनोज शर्मा ने योग और मानसिक स्वास्थ्य पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में भविष्य में मर्म चिकित्सा चिकित्सालय स्थापित करने का सुझाव भी रखा गया। आयोजन के संयोजक प्रो. (डॉ.) ओम नारायण तिवारी एवं आयोजक सचिव डॉ. सुरेंद्र प्रसाद रयाल ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह और तुलसी पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन, एनसीसी अधिकारी, वालंटियर्स, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। अंत में अंतरराष्ट्रीय योग प्रोटोकॉल की शपथ दिलाई गई और आयुष मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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